तू ऐसी क्यों है ??

img-20170119-58808fc45870bसबसे पहले मेरा उन सभी लोगो को बहुत धन्यवाद जिन्होंने मेरा पहला लेखन पढ़ा और मुझे खूब सराहा I आज, मेरी ये कविता एक ऐसे शक्स पर आधारित है जिसका ना तो हम इस दुनिया में किसी से तुलना कर सकते है और न ही उसका एहसान चूका सकते हैं I उसके प्यार को सिर्फ ज़िन्दगी भर महसूस कर सकते है I

तू ऐसी क्यों है?

नौ महीने गर्भ में रख लेती है , इतना दर्द तू कैसे सह लेती है ,

मेरे छोटे से गम को अपना बना लेती है, हमेशा तू कैसे मुस्कुरा लेती है ,

‘माँ’ तू ऐसी क्यों है?

तू ऐसी क्यों है?

हर रिश्ता हँस के निभा लेती है, हर इन्सान को अपना बना लेती है,

तेरे प्यार की ना कोई गहराई है , और ना ही कोई ऊँचाई है,

‘माँ’ तू ऐसी क्यों है?

तू ऐसी क्यों है?

सारा दिन मेहनत करती है, बदले में कभी कुछ नही मांगती है ,

तू इतनी सौम्य, इतनी प्यारी क्यों है ,

‘माँ’ तू ऐसी क्यों है?

तू ऐसी क्यों है?

जब दुनिया की तपीश में हम झुंझला जाते हैं, तेरे आँचल की छांव जैसी ठंडक खोजते हैं,

तू ही हर मर्ज़ की दावा है, मेरे हर ख़ुशी की पहचान है,

‘माँ’ तू ऐसी क्यों है?

तू ऐसी क्यों है?

अपने दुखों को हमेशा छुपाती है, बेटी की विदाई में सब से ज्यादा तू रोती है,

कलेजे के टुकड़ो को दूर होता नहीं देख सकती है, फिर भी तू मजबूर हो जाती है,

‘माँ’ तू ऐसी क्यों है?

तू ऐसी क्यों है?

खुश रहें सभी बस ये प्रार्थना करती है, बेटे को तू जान से ज्यादा चाहती है,

तरक्की करता है बेटा और तू खुद को सबसे खुशनसीब समझती है,

‘माँ’ तू ऐसी क्यों है?

तू ऐसी क्यों है?

तू जन्नत है, तू मन्नत है, तू ही मेरा संसार है,

तू है तभी तो ये ज़िन्दगी इतनी हसीन और खुशहाल है,

‘माँ’ तू ऐसी क्यों है?

 तू ऐसी क्यों है?

तुझ जैसा ना कोई है और ना ही कभी हुआ है , तेरी तुलना किसी से करना अनूचित है,

तेरे जैसा बनना मुश्किल ही नही नामुमकिन है, माँ तू ही तो भगवान का असल अवतार है,

‘माँ’ सिर्फ तू ही ऐसी क्यों है?

आशा करती हूँ ये कविता पढ़ के आपको अपनी माँ की याद जरूर आएगी और आँखे नम तो होना स्वभाविक है I अगर आपको ये कविता अच्छी लगी तो अपने सुझाव मुझे जरूर दें I शुक्रिया I

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21 thoughts on “तू ऐसी क्यों है ??

  1. भगवान को मंदिरो मै ढूंढने के बजाय घर के मंदिर मै बेठी माँ से मिलो!!! Beautiful

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  2. माँ…. एक ऐसा शब्द जिसके जितने ही गुण गा लें, कम ही होगा…. क्योंकि उसके गुणों का कोई अन्त नहीं है…. 🙏🙏

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  3. माँ….
    अपने आप में एक सागर है
    जिसकी ममता की गहराई माप पाना असम्भव है…. नमन है 🙏🙏

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  4. माँ….
    स्वयम् में एक पूर्ण वाक्य है
    शायद ख़ुद में कई ब्रह्माण्ड समेटे हुए है….
    अतः नमन है…. 🙏🙏

    Liked by 1 person

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